BJP

भारतीय जनता पार्टी

जनसंघ के बाद 6 अप्रैल 1980 को भारत के इतिहास में नये भाजपा का जन्म हुआ। जिसने तवांग से ओखा और देम छोक से पोर्ट ब्लेयर तक भारत की संस्कृति और उसकी मर्यादा को अक्षुण्ण बनाये रखने का संकल्प लिया। यह दिन भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक स्वर्णिम काल के रुप में अंकित है। भारतीय जनता पार्टी ने देश की राजनीति में सिद्धांतों, विचारों व जीवन मूल्यों को स्थापित

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कर इस पर चलने का संकल्प लिया है। भाजपा का ध्येय केवल सत्ता प्राप्ति नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का सर्वागींण विकास है…. भारत की चहुँओर प्रतिष्ठा और भू-सांस्कृतिक अवधारणा को मजबूत करने के लिए जो भी कदम उठाये जाने चाहिए वह भाजपा अपने स्थापना काल से ही उठाती रही है। हमारे प्रेरणा स्त्रोत रहे डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय जी ने स्वयं को इस अवधारणा की बलिवेदी पर न्यौछावर भी किया। जनता पार्टी में दोहरी सदस्यता के नाम पर जिस दल को परेशान लाचार व, उसकी आस्था पर सवालिया निशान खड़ा किया गया था, आज वहीं दल वटवृक्ष के रुप में भारत की भूमि पर राजनीतिक शुचिता लाने की कोशिश में जुटा है। देश के आधे से अधिक भूभाग पर इस दल का शासन है और पूरे देश में भाजपा की मौजूदगी।

कांग्रेस की तानाशाही रवैये का खुलकर हमारी पार्टी ने विरोध किया। 1967 में इसी अधिनायकवादी तन्त्र के खिलाफ केन्द्र में संविद सरकार बनी। जिसमें जनसंघ के साथ-साथ कम्युनिस्ट भी शामिल हुए। विचार व निष्ठा की तारतम्यता नहीं रहने के बावजूद देश हित को सर्वोपरि मानते हुए भारतीय संसद में मात्र दो सांसदों से भाजपा की यात्रा आरम्भ हुर्इ जिसे कभी नहीं पनपने वाली पार्टी की संज्ञा दी गयी थी; लेकिन आज उसी पार्टी का स्वरुप देश में सब तरफ देखा जा सकता है। भारत में कभी संसदीय लोकतन्त्र फल-फूल नहीं सकता है। ऐसा दुष्प्रचार आरम्भ हुआ। लेकिन चन्द सालों में ही भाजपा ने देश में अपनी राजनीतिक मजबूती से दुनिया को अवगत कराया  और आज भारत में संसदीय लोकतन्त्र न केवल फल-फूल रहा है बल्कि विश्व राजनीति को दिशा देने में भी पूर्ण सक्षम है।
1989 में कांग्रेस के परिवारवाद, सत्ता का दुरुपयोग और उसकी नीतियों की वजह से देश पर संकट मडराने लगा, तो भाजपा ने विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार को समर्थन दिया। जिसमें कम्युनिष्ट भी शामिल थे; लेकिन जब इस सरकार ने राष्ट्रीय अस्मिता, रामजन्मभूमि व भारत की आस्था से जुड़े सवालों को वोट के नजरिये से देखने का प्रयास किया, तो हमने सरकार से फौरन समर्थन वापस ले लिया। देश हित में संकल्पित भाजपा 1991 में संसद में मुख्य विपक्षी दल बनी। 1996 में पहली बार हमारी केन्द्र में सरकार बनी,  तब गैर कांग्रेसवाद की राजनीति के विरोधी दल गैर भाजपा की राजनीति करने में जुट गये।
जनता की ताकत से  केन्द्र में भाजपा की सरकार बनी। हमने काम के आधार पर अपना परिचय दिया। देश के सभी क्षेत्रों में बुनियादी विकास की नींव को सुदृढ़ कर विकास की नवीन परिभाषा गढ़ी…….चौड़ी व चमचमाती सड़कें, गरीबी नियन्त्रण, खाधान संकट से निजात और उसका बडे़ पैमाने पर निर्यात, सर्वशिक्षा अभियान, भ्रष्टाचार पर नियन्त्रण  कर्मचारियों व अधिकारियों में अपने कार्यों के प्रति कर्तव्यता, स्कूल-कालेज में शिक्षा की गुणवत्ता, परमाणु शक्ति से देश को सम्पन्नता, आतंकवादियों व घुसपैठियों पर नियन्त्रण व विश्व बाजार में आर्थिक मन्दी के बावजूद महँगार्इ पर लगाम लगाकर हमने साबित कर दिखाया कि यदि मन में राष्ट्र को समुन्नत करने का दृढ़ संकल्प  हो तो दुनिया की कोई ताकत हिन्दुस्थान को परम वैभव प्राप्त करने से नहीं रोक सकती । संचार क्रांति के माध्यम से सुदूर गाँव को महानगरों से जोड़ने का काम किया, जिसे देश ने करीब से देखा है। भाजपा अकेली राष्ट्रीय पार्टी है जो वन्देमातरम को आजादी का मूल मन्त्र मानती है; गौरक्षा, गंगा की पवित्रता और राम और कृष्ण जन्मभूमि पर भव्यता बनाये रहने के पक्ष में भाजपा अपने स्थापना काल से ही खड़ी है। आतंकवाद का हम खुलकर विरोध करते  है और करते रहेंगे । देश में मजहबी ताकतों का विरोध भाजपा करती आई है लेकिन अन्य दल चुप्पी साध कर बैठे रहे हैं। लोकतन्त्र के प्रति आस्था रखते हुए भाजपा ने बाहर ही नहीं बल्कि पार्टी के अन्दर भी स्वच्छ लोकतन्त्र को स्वीकार किया है। भाजपा स्वाभाविक देश की अकेली पार्टी है जिसे जनता ने “ समर्थ भाजपा समर्थ भारत” की संज्ञा से पुरस्कृत किया है ।

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